पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध
सन्दर्भ
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री के साथ भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग की 8वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की।
परिचय
- दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल संपर्कता तथा अवसंरचना के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
- दोनों देशों ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, बहुपक्षीय समन्वय को सुदृढ़ करने तथा भारत-आसियान संबंधों को और गहरा करने पर बल दिया।
- दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों से जुड़े क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की तथा निकट सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-इंडोनेशिया संबंध : एक संक्षिप्त अवलोकन
1.संबंधों की आधारशिला
- उपनिवेशवाद का साझा अनुभव तथा स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के समान उद्देश्य भारत और इंडोनेशिया के बीच मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का आधार बने।
- वर्ष 1951 में भारत और इंडोनेशिया ने मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य स्थायी शांति एवं अटूट मित्रता स्थापित करना था।
2. गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भूमिका
- भारत और इंडोनेशिया ने संयुक्त राष्ट्र में एशियाई एवं अफ्रीकी देशों की स्वतंत्र आवाज़ के रूप में कार्य किया।
- इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1955 में बांडुंग सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसने आगे चलकर वर्ष 1961 में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।
- भारत और इंडोनेशिया, यूगोस्लाविया, मिस्र तथा घाना के साथ गुटनिरपेक्ष आंदोलन के पाँच संस्थापक नेताओं में शामिल थे।
3. ‘लुक ईस्ट’ से ‘एक्ट ईस्ट’ तक
- वर्ष 1991 में भारत की ‘लुक ईस्ट नीति’ अपनाने तथा 2014 में इसे ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में परिवर्तित करने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तीव्र प्रगति हुई।
4. व्यापारिक संबंध
- इंडोनेशिया, आसियान क्षेत्र में सिंगापुर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
द्विपक्षीय व्यापार:
- 2005-06 : 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर
- 2022-23 : 38.84 अरब अमेरिकी डॉलर
- 2023-24 : 29.40 अरब अमेरिकी डॉलर
5. साझा बहुपक्षीय मंच
- भारत और इंडोनेशिया निम्न प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों में सक्रिय भागीदारी करते हैं—ब्रिक्स,जी-20,हिंद महासागर रिम एसोसिएशन,पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन। इन मंचों के माध्यम से दोनों देश वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
- वर्ष 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।
- इसी वर्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-इंडोनेशिया समुद्री सहयोग हेतु साझा दृष्टिकोण को भी अपनाया गया।
भारत के लिए इंडोनेशिया का महत्त्व
- नीतिगत सामंजस्य
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ तथा हिंद-प्रशांत महासागर पहल, इंडोनेशिया की ‘वैश्विक समुद्री धुरी’ (Global Maritime Fulcrum) की अवधारणा के साथ अच्छी तरह मेल खाती हैं।
- यह सामंजस्य निम्न क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है—
- समुद्री सुरक्षा
- संपर्कता (कनेक्टिविटी)
- व्यापार एवं आर्थिक विकास
- आपदा प्रबंधन
- सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन
- दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, समावेशी, सुरक्षित एवं नियम-आधारित व्यवस्था के समर्थक हैं।
2. सामरिक संतुलन स्थापित करने में भूमिका
- इंडोनेशिया की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति तथा बढ़ता क्षेत्रीय प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व के संतुलन में सहायक हो सकता है।
- इंडोनेशिया, मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- इंडोनेशिया के साथ मजबूत संबंध भारत को समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने,नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने,क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने में सहायता करते हैं।

3. समुद्री सुरक्षा
- हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के मध्य स्थित इंडोनेशिया की रणनीतिक स्थिति उसे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण साझेदार बनाती है।
- समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में दोनों देशों की साझा रुचि है।
4. आतंकवाद-रोधी सहयोग
- उग्रवाद, आतंकवाद तथा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
- खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण तथा सुरक्षा सहयोग के माध्यम से दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं।
5. गहरे सांस्कृतिक संबंध
- भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध अत्यंत प्राचीन हैं।
- हिंदू परंपराओं तथा रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों का प्रभाव इंडोनेशिया की संस्कृति में आज भी स्पष्ट दिखाई देता है।
- ये सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के बीच जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ बनाते हैं।
6. पर्यटन की संभावनाएँ
- साझा सांस्कृतिक विरासत का उपयोग पर्यटन तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
- धार्मिक, सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्त्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है।
चुनौतियाँ
1.व्यापार असंतुलन
- भारत-इंडोनेशिया व्यापार में संतुलन प्रायः इंडोनेशिया के पक्ष में रहता है।
- इसका प्रमुख कारण भारत द्वारा इंडोनेशिया से पाम तेल तथा कोयले का बड़े पैमाने पर आयात है।
- दोनों देश व्यापार के नए क्षेत्रों का विकास कर इस असंतुलन को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
2. क्षेत्रीय तनाव
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तथा चीन का बढ़ता प्रभाव दोनों देशों के लिए चुनौती प्रस्तुत करता है।
- भारत और इंडोनेशिया को अपनी सामरिक साझेदारी बनाए रखते हुए इन क्षेत्रीय दबावों का संतुलित ढंग से सामना करना पड़ रहा है।
निष्कर्ष
- भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध बहुआयामी, गतिशील और निरंतर विकसित हो रहे हैं।
- ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक निकटता, आर्थिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के साझा हित इन संबंधों की मजबूत आधारशिला हैं।
- आने वाले वर्षों में दोनों देशों के पास क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास, समुद्री सहयोग तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और अधिक गहरा करने की व्यापक संभावनाएँ हैं।
स्रोत: MEA
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संक्षिप्त समाचार 06-06-2026